पूजा विधि

पितृदोष पूजा

अवधि: 3 दिन

नारायण नागबली ये श्राद्ध "काम्यश्राद्ध" कहलाते है| पितरो के प्रीतर्थ किये जाने वाले श्राद्ध को शास्त्र से पित्तृयद्न्य कहते है| पितरही अपने कुल का रक्षण करते है| इसलिए उनका श्राद्ध करके उन्हे संतूष्ट रखें ये शास्त्र में बोला गया है |

नारायण नागबली पूजा

अवधि: 3 दिन

नारायण नागबली ये श्राद्ध "काम्यश्राद्ध" कहलाते है| पितरो के प्रीतर्थ किये जाने वाले श्राद्ध को शास्त्र से पित्तृयद्न्य कहते है| पितरही अपने कुल का रक्षण करते है| इसलिए उनका श्राद्ध करके उन्हे संतूष्ट रखें ये शास्त्र में बोला गया है |

महामृत्युंजय जाप

अवधि:7 दिन

महामृत्युंजय मंत्र के वर्णो (अक्षरों) का अर्थ : महामृत्युंजय मंत्र के वर्ण पद वाक्यक चरण आधी ऋचा और सम्पुतर्ण ऋचा-इन छ: अंगों के अलग अलग अभिप्राय हैं। ओम त्र्यंबकम् मंत्र के 33 अक्षर हैं जो महर्षि वशिष्ठर के अनुसार 33 देवताआं के घोतक हैं। उन तैंतीस देवताओं में 8 वसु 11 रुद्र और 12 आदित्यठ 1 प्रजापति तथा 1 षटकार हैं।

रुद्रा अभिषेक

अवधि: 5 दिन

अभिषेक का अर्थ होता है स्नान करना या कराना। रुद्र अभिषेक जहां पंचामृत पूजा मंत्रोच्‍चारण के साथ त्र्यंबकेश्वर भगवान को अर्पण किया जाता है इससे उस व्यक्ति की सभी मनोकामना पुर्ण होती है।

नक्षत्र शांति

अवधि:2 दिन

संतोष, शांति, आध्यात्मिक ज्ञान, मानवीय भावनाओं और सभी प्रकार कि प्रगति यह एक ग्रह शांति अनुष्ठान के माध्यम से प्राप्त किया जा रहा है| यह सकारात्मक माहौल पर्यावरण के भीतर बनाऐ रखनमे और विशिष्ट इरादों को पूरा करने में मदद करता है जिससे एक वातावरण के निर्माण में मदद करता है| सकारात्मक माहौल परिवार कि खुशिया बनाये रखता हे

नवग्रह शांति

अवधि: साल में एक बार पूजा

यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण धार्मिक समारोह है| माता - पिता ये दोनों मंगलाचरण में प्राथमिक आंकड़े हैं| माता - पिता की ओर से कार्यवाहक उनके बेटे और बेटी की शादी की अवधि के दौरान शांति सुनिश्चित करने के लिए ये शांति कि जाती हे |

त्रिपिंडी श्राद

अवधि: साल में एक बार पूजा

पितरों की प्रसन्ता‍ के लिये धर्म के नियमानुसार पिंड प्रदान आदि कर्म करना ही श्राध्द कहलाता है। श्राध्द करने से पितरों कों संतुष्टि मिलती है और वे सदा प्रसन्न रहते हैं और वे श्राध्द कर्ता को दीर्घायू प्रसिध्दि, तेज स्त्री पशु एवं निरागता प्रदान करते है।

वास्तु शांति

अवधि: जीवन में एक बार पूजा

वास्तु का मतलब संस्कृत में प्रकृति , या पर्यावरण है! वास्तु का मतलब गृह,आवास का निर्माण करना है! पंच महाभूतो(जैसे पृथ्वी, स्थान, वायु, अग्नि और जल),गुरूत्वाकर्षण बल और चुम्बकीय ऊर्जा और ग्रह जैसे सूर्य और चंद्रमा और नक्षत्रों आदि के प्रभाव आपणे जीवन में पृथ्वी पर होते है!इसीको वास्तु शास्त्र कहते है ! मनुष्य और पर्यावरण के बिच संतुलन बनाने के लिए और वास्तु पुरुष के घरमे सुख और शांति लानेके लिए वास्तु शांति करना आवशक है !

नवचंडी यज्ञ

अवधि: साल में एक बार पूजा

नवचंडी यज्ञ हवन एक बहुत, अद्वितीय दुर्लभ और विस्तृत यज्ञ है| नवचंडी यज्ञ हवन महान योग्यता करवाके और देवी मां से विशाल आशीर्वाद प्राप्त करवाता है| एक विशाल ऊर्जा प्राप्त करनेके लिए है|इसीलिए नवचंडी यज्ञ किया जाता है| नवचंडी यज्ञ से विजय प्राप्त की जा सकती है और एक ही समय में देवी मां से विशाल आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है!

उदाका शांति

अवधि: साल में एक बार पूजा

उदाका शांति पूजा किसी भी शुभ परिणाम की तलाश के लिए आदर्श है - यह काम, स्वास्थ्य या वित्तीय घर पर किसी भी समस्या या तनाव, हो। पूजा जीवन में और अपने घर में शांति और सद्भाव के लिए दूसरों के बीच में शादी,उपनयनम ,गृहप्रवेश , जैसे प्रमुख घटनाओं, से पहले किया जाता है।

योग शांति

अवधि: साल में एक बार पूजा

कनारा शांति

अवधि: साल में एक बार पूजा